ये जो अश्क हैं ना
ये जो मुस्कुराहट है ना चेहरे पे हजार सैलाब पाले है खिलखिलाती धूप सी जो दिखती है आगोश में अंधेरा संभाले है । मैं नजर आता हूँ दौड़ता तुमको इन पाँवो में लाख छाले हैं गिर गया गर कहीं लड़खड़ाकर तो कौन हमें उठाने वाले हैं। ये जो आँखे चमकती हैं ना मेरी अश्कों से भरे खामोश प्याले हैं छलक जो गए गर जरा भी कोई नहीं इन्हें रोकने वाले हैं ।