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Showing posts from September, 2018

आस मिलन की

आस मिलन की ••••••••••••••••••••••••• चाँदनी रात में शहर भर की रोशनी पिया मिलन की आस में बैचेन सी कभी इस घर कभी उस मोहल्ले... छिप गया चाँद भी किसी अटारी की ओट में कि तारों के म...

एक अनकही तलाश

वो उनके पहलू में घंटो सिर रखकर हर भाव में तलाश कोमल सी मुस्कानों की यूँ कभी उदासी के आलम में खुद भी उदास हो जाना उस उदासी में तलाश उनकी आँखों के मैखानों की कभी खो सा जाना कहीं ...