ये रंज भी कुछ अपने से लगते हैं बस चेहरे की रंगत अनजान सी है छुपा भी लेता ये दर्द की लकीरें कमबख्त चेहरे पर मुस्कान सी है | दो ही कदम चला उनके बगैर मैं ना जाने क्यों मीलों थकान सी ...
ना चाहत दुर्गा बनने की ना दैवीय इच्छाएँ वो इंसान है इंसान बनी रहने दो | झकझोरते हैं उसे पूजा श्रद्धा और आरती से विशाल शब्द रोती है उसकी आत्मा जब होता है बलात्कार किसी दुर्ग...
असमंजस बड़ा है चेहरे पर मुस्कान है जी में सैलाब है चहकती चिड़ियाओं को देखता हूँ रूँधा गला थरथराते होंठ बस मुस्कुराता हूँ या कहूँ कोशिश भर करता हूँ | महकते पुष्प जगाते हैं ...
मैं जीना चाहता हूँ हर पल को, महसूस करना चाहता हूँ हर उस महक को, जो इन फिजाओं में घुली है | इन पलों को जब कोई चुरा ले या फिर कहूँ छीन ले तो मैं एक आम इंसान की तरह छटपटाता हूँ, रोता हूँ, ...