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Showing posts from March, 2019

तन्हाई

तन्हाइयों में आवाज नहीं है इन पंखो में परवाज नहीं है बजते थे रातों महफिल में उन घुँघरू में साज नहीं है रोशन करता था जग को उस सूरज में आग नहीं है

बिखरे पल

ये रंज भी कुछ अपने से लगते हैं बस चेहरे की रंगत अनजान सी है छुपा भी लेता ये दर्द की लकीरें कमबख्त चेहरे पर मुस्कान सी है | दो ही कदम चला उनके बगैर मैं ना जाने क्यों मीलों थकान सी ...

एक इंसान

ना चाहत दुर्गा बनने की ना दैवीय इच्छाएँ वो इंसान है इंसान बनी रहने दो | झकझोरते हैं उसे पूजा श्रद्धा और आरती से विशाल शब्द रोती है उसकी आत्मा जब होता है बलात्कार किसी दुर्ग...

एक सैलाब

असमंजस बड़ा है चेहरे पर मुस्कान है जी में सैलाब है चहकती चिड़ियाओं को देखता हूँ रूँधा गला थरथराते होंठ बस मुस्कुराता हूँ या कहूँ कोशिश भर करता हूँ | महकते पुष्प जगाते हैं ...

बस मलाल

मैं जीना चाहता हूँ हर पल को, महसूस करना चाहता हूँ हर उस महक को, जो इन फिजाओं में घुली है | इन पलों को जब कोई चुरा ले या फिर कहूँ छीन ले तो मैं एक आम इंसान की तरह छटपटाता हूँ, रोता हूँ, ...