एक बड़ा दरवाजा प्रताप सा अटल मीरा सी पवित्र एक खिड़की कुछ भँवरे सूर्य अस्ताचल अँधेरे सा इंतजार लाल पीळी तितलियां कुछ नाजुक सी कुछ नीली सी मिलन को आतुर एक सड़क कुछ संगम सी बेचैन सी एक कशिश अनछुई लालसा का सैलाब कोशिश बेमेल सी कुछ असफल सी कुछ कहानियां बनी कुछ कसक सी रही कुछ बनने के इंतज़ार में इंतजार ही रही श्वेत और नील मिलन अधूरा रहा नियति थी नीयत ही रही | सड़क पर चलते ट्रकों ने कुछ कील वाले जूतों ने कुचला हर बार उस कहानी को कुछ नजरें कुछ जोड़ी कोमल पांव बुनते हैं कहानी आज भी कुछ बनने कुछ बिगड़ने को 📝 किरण