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Showing posts from April, 2018

सवाल खुद से

आसाराम : एक आशा °°°°°°°°°°°°°°°°°°°° आसाराम एक ऐसा चेहरा था जो एक बहुत बड़े समूह के आराध्य देव से कम नहीं था आज जब उसके विडियो देखते हैं उसे कृष्ण बना देखकर घृणा होती है | ये ही फ...

जाग

कौनसा ईश्वर? जो मन्दिर में रहता है! कौनसा अल्लाह? जो मस्जिद में रहता है कहीं पलते हैं देशद्रोही कहीं होते हैं बलात्कार.... नहीं जागेगा ईश्वर अपने अंदर का इंसान जगा ले मौन मत रह ...

शर्मिंदा हूँ

एक नन्ही चिड़िया पर भी ना उगे थे सीख रही थी चहचहाना कुछ शिकारी उन्मादक हौंसले निर्भीकता बेधड़क रौंदा कुचला मसला काटा रूह ना कांपी हैवानियत की हदें ना उड़ पाई ना भाग पाई त...

सड़क : एक अधूरी कहानी

एक बड़ा दरवाजा प्रताप सा अटल मीरा सी पवित्र एक खिड़की कुछ भँवरे सूर्य अस्ताचल अँधेरे सा इंतजार लाल पीळी तितलियां कुछ नाजुक सी कुछ नीली सी मिलन को आतुर एक सड़क कुछ संगम सी बेचैन सी एक कशिश अनछुई लालसा का सैलाब कोशिश बेमेल सी कुछ असफल सी कुछ कहानियां बनी कुछ कसक सी रही कुछ बनने के इंतज़ार में इंतजार ही रही श्वेत और नील मिलन अधूरा रहा नियति थी नीयत ही रही | सड़क पर चलते ट्रकों ने कुछ कील वाले जूतों ने कुचला हर बार उस कहानी को कुछ नजरें कुछ जोड़ी कोमल पांव बुनते हैं कहानी आज भी कुछ बनने कुछ बिगड़ने को   📝 किरण

वन वे चौघड़िया

एक सवाल जो हिलोरें मार रहा है बड़े जोरों से .... कुछ लोगों ने सलाह दी यात्रा के समय श्रेष्ठ चौघड़िया देख कर यात्रा प्रारम्भ करनी चाहिए | पूछा कौनसा श्रेष्ठतर है.... शुभ और लाभ और अम...

कुछ खास खयालात

मुरीद तो हम थे ही ना जाने अब क्या हो गए ख्वाबों में आते थे अब रूबरू हो जाया करो ये जो मुहब्बत है आपकी संभाली नहीं जाती ख्वाब में तो आते हो चलो दिल में भी आ जाया करो उस ख्वाब के खय...

ये जख्म कुछ पुराना है

एक पुराने जख्म से कुछ रिस रहा है आज, मवाद मिश्रित रक्त का रंग कुछ मटमैलापन लिए हुए है और सड़ांध तो इतनी कि सांस लेना भी दूभर हो गया है| घाव को नासूर बनाने से सम्बंधित फिल्मी संव...