Posts

खूबसूरत जहाँ

मुसाफ़िर हूँ अनजान राहों का  घूमता रहा अनजानों में  कभी सहराओं में ,कभी पहाड़ों में  भीड़ में कभी , कभी वीरानों में  मैं खुद के अक्स को खोजता  भटकता रहा हमेशा बियाबानों में  वो दिखी एक मंद सी लौ  कहीँ दूर आसमानों में  शमां थी शायद उस अंधेरे खंडहर में  देखा जो उधर तो लगा  अंधेरा भीतर है मेरे खंडहर में नहीं  मगर तलाश पूरी हुई  वो शमां नहीं , शमाऐं थी  एक नहीं आठ थी  अंदर के अंधकार को मिटा गई  रोशनी सी भर गई  खाली जो था , भर गया  बस अब प्यार था , मोहब्बत थी  कुछ खिलखिलाते चेहरे  कुछ मुस्कुराते चेहरे  रंग बिरंगे  एक दूसरे को जगाते  और उनके बीच मैं  और हमारा खूबसूरत जहाँ 🥰😘😘

युद्ध खुद से

एक अंतर्द्वंद्व हर वक्त मेरे जेहन में  पिघलते फौलाद सा दौड़ता है  रगों में कुछ यूं बहता  जैसे नासूर से बहती लोहित मवाद। जिगर यूँ कि मांस का लोथड़ा  टपकती लहू की बूंदे उधड़े जिस्म से  जिस्म सीने के औजार कुछ खंजर से  कुछ घावों को चीर कर रफू किया  कुछ खुले रहे ,भिनभिनाती मक्खियाँ  खुली हैं ये आँखे टपकता है लहू  ये सपना है या हकीकत , नहीं जानता   बस ये खबर है  ये मैं तो नहीं हूँ  मैं तो था  ये मैं नहीं हूँ 

संग मैं हूँ !

जिंदगी जब तकलीफ दे  हालात मुश्किल हों  घुटने लगें सांसे हलक से निवाला ना उतरे  दिल पर हाथ रख  महसूस कर  उन धड़कन के संग मैं हूँ । पाँव डगमगाएँ कांपने लगे हाथ भी  लड़खड़ाए जुबान बोलते वक्त  निकले अल्फ़ाज़ महसूस कर  उन अल्फ़ाज़ों में संग मैं हूँ! जहाँ इम्तिहान लेने लगे  खुद की रूह नासाज़ हो  कुछ भी अपना सा ना लगे  घुल जाए फ़िज़ाओं में ज़हर  हवाओं को महसूस कर  खुशबू ना सही , टूटी सांस लौट आए  इतना सा संग मैं हूँ ।

लहूलुहान

अपने हाथ से  निकाला कलेजे को बाहर  खंजर मेरा ,कलेजा भी मेरा  चीर डाला  उतरा खून आँखों में बहुत  लहूलुहान थे हाथ मेरे  हाथ भी मेरे , खून भी मेरा  वो पड़ा उधर देख जमीन पर  कुछ तड़पता सा  धड़कन अभी मौजूद थी  मुझे देख रहा था कातर नजरों से  कह रहा था, कातिल है तू ... कत्ल भी मेरा ,गुनाह भी मेरा... तमाशबीन भी थे मौजूद वहाँ  कहा ! कौन है कातिल यहां  किसका यहां खून हुआ  मैंने कहा... कातिल मैं हूँ  और खून भी मेरा हुआ 

मूसक

मूसक लाया नन्हा शेरू  हम बन गए हैं मौसाजी  हम खाएंगे रसगुल्ला  तुम खाओ समोसा जी  नाम रखा उसका शेरू  लगता वो है चूसा जी  सीमा माँ तो बड़ी खुश है  मैं खाऊँगी डोसा जी  आओ सब मिल खुशी मनाएं  घर में आया चूसा जी 🥰

खाली बस खाली

आज कुछ खाली 7कि आप गन।के  सा क्यों हओ8कबि न के ये बेचैनी , ये दर्द ,ये तकलीफ  और ये चुभन  जो आँखों से कुछ बूँद गिरी  ये खाली और खाली होता गया  इस खाली को भरने की कोशिश में  सब कुछ खाली होता दिख रहा है,  😥😥।L lमोब नज्झल ह

ये जो अश्क हैं ना

ये जो मुस्कुराहट है ना चेहरे पे  हजार सैलाब पाले है  खिलखिलाती धूप सी जो दिखती है  आगोश में अंधेरा संभाले है । मैं नजर आता हूँ दौड़ता तुमको  इन पाँवो में लाख छाले हैं  गिर गया गर कहीं लड़खड़ाकर  तो कौन हमें उठाने वाले हैं। ये जो आँखे चमकती हैं ना मेरी  अश्कों से भरे खामोश प्याले हैं  छलक  जो गए गर जरा भी  कोई नहीं इन्हें रोकने वाले हैं ।