Posts

Showing posts from May, 2019
चांचल्य और लावण्य का मधुर मिश्रण जैसे मिली हो मिश्री नवनीत में कांतिमय आभा दमकता चेहरा चाँदनी रात नहाई जैसे मधुर संगीत में वो चन्द्रकिरण वो चपल चाँदनी

मैं वैसी ही हूँ, जैसी थी

तुम कुछ महसूस होने लगी दिल के उस कोने में जो कुछ खाली सा था मैंने उसको कहा !! शायद हम भी गुनगुनाते होंगे तुम्हारे खाली मकाँ में अरिजीत बनकर वो मुस्कुराई थोड़ा शरमाई बदले भाव ...
हेत अर प्रीत री बंतळ
उठ कर तो आ गए हैं तिरी बज़्म से मगर कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आए हैं

बंधन बेनाम

वो हड़बड़ाई माथे पर पसीने की कुछ बूँदे उभर आई चेहरा सफेद नजरें कातर चेहरा घुमाया उस शख्स की ओर जिस पर भरोसा खुद से ज्यादा वो भी घबराया पर अपनी घबराहट छिपाकर मुस्कुराया कह...