कागद पर उकेरना शेष है

एक अटल वृक्ष की यादों को संजोया
डिजिटल दुनिया के पन्ने पर
श्रद्धांजलि के कुछ शब्द
खो से गये उसी दुनिया में
भावों को 'अजय'करने की इच्छा
अजै शेष है
शेष है वेदना को कागद पर उकेरना
उत्तर की अभिलाषा में
निरूत्तर हूँ अभी तक
शब्दों को भाषा मिलती
अपनी सी
तो श्रद्धांजलि कुछ सच्ची सी लगती |
     📝 किरण कुमार
   

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