यादें
22 साल बाद
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थैंक्यू सोशल मीडिया
कल की सी बात लगती है , 30 जून 1994 दोपहर का समय
दोस्तों से पता चला दसवीं का परिणाम जारी हुआ है ,
मन में भय मिश्रित उत्सुकता !
बड़ी भागदौड. के बाद राजस्थान पत्रिका के विशेष संस्करण का जुगाड़ हुआ |
पहली बार परिणाम अखबार में देखना एक अलग अनुभव....
काँपते हाथो से दोस्तों के सहयोग से परिणाम देखा ...
पहला लक्ष्य प्राप्त हो गया , प्रथम श्रेणी वालो में हमारा भी रोलनम्बर मिल गया दिल बाग बाग हो गया ...दोस्तों ने बधाई दी |
कुछ दिन बाद अंकतालिका मिली
अपेक्षानुरूप अंक प्राप्त हुए .......
धारणा के अनुसार इतने अंक के बाद घरवालों ने मेरे लिए गणित ऐच्छिक विषय का निर्धारण भी कर दिया |
अब अच्छे स्कूल का चयन एक चुनौती थी
विचार मंथन हुआ लम्बी मन्त्रणाएं चली रिश्तेदारों से भी विचार विमर्श किया गया .....
और अंत में हमारे शिक्षक मामाजी के सुझाव पर अंतिम मोहर लग गई ....
मेरे लिए सेठ पीरामल सीनियर सैकण्डरी स्कूल बगड़ का चयन किया जो उस समय के प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक थी |
एक लम्बी और जटिल प्रवेश प्रक्रिया के बाद अंतत: प्रवेश मिल गया |
आवास के रूप में पीरामल हॉस्टल में प्रवेश ले लिया |
हॉस्टल का रूम नम्बर 13 इंतजार कर रहा था साथ ही अजीब से डरावने चेहरों वाले साथी भी....
अजीब से डरावने चेहरे इसलिए कि सब अजनबी और कद काठी में मुझसे बहुत भारी.....
धीरे धीरे घुलमिल गए ....भारी भरकम से सामान्य हो गए....आनन्द की शुरूआत हो गई थी .....साथी क्रिकेट के एक्सपर्ट थे मैंने भी उनके साथ एक्सपर्ट बनने का खूब असफल प्रयास किया | विकास की बॉल तो नहीं झेल पाया पर कयूम को कभी कभी चौका ठोक कर अपने आप को क्रिकेटर समझ लेता था |
बगड़ में सिनेमा नहीं हुआ करता था ...सो रब्बू का विडियो हमारे मनोरंजन का मुख्य साधन हुआ करता था....
कभी कभी रूम नम्बर 13 के आठों दोस्त रात को दीवार कूदकर रब्बू के विडियो का आनन्द लेने जाते थे |
पर हम साथ साथ थे ....हॉस्टल वार्डन पाँडे जी सर से एक साथ मुर्गा बनकर खाई मार आज भी याद आती है |
दो साल बहुत जल्दी बीते .....सीनियर उत्तीर्ण हुई और बिछड. गए..
आज की तरह माोबाइल नहीं हुआ करते थे सो उसके बाद उनसे मुलाकात नहीं हुई |स्नातक अधिस्नातक बी़एड मे अपने नए दोस्त तलाश कर लिए......कैरियर बनाने के सपनों को पूरा करने में लग गए .......समय और नियति के अनुसार सब अपने काम में लग गए....अब किशोरावस्था से युवावस्था में प्रवेश कर चुके थे |
शादी हुई...
बच्चे हुए....
जीवन में थोड़ा ठहराव आया.......
पुराने दोस्त कुछ याद आने लगे ...
सोशल मीडिया ने अपना काम बखूबी निभाया ....
अभी सप्ताह भर पहले सोशल मीडिया पर सर्च ऑपरेशन के दौरान Kayum Togaria से मुलाकात हो गई ......कड़िया मिली ..Yogender Singh भी मिल गया
Vikash Ganash को भी रिक्वेस्ट भेजी पर विकास ने अपना संशय दूर करनें में तीन दिन लगा दिए.....
आखिर पहचान गया और हमारे मित्रता प्रस्ताव को 22 साल बाद पुन: स्वीकार किया |
वार्ता हुई .....बातों में भी प्रेमी और प्रेयसी सी फीलिंग थी ....
पता चला विकास आर्मी से रिटायर हो कर फिर से डिफेन्स के क्षेत्र में ही है
योगेन्द्र नेवी से रिटायर हो कर जयपुर AG office में ऑडिटर है .....कयूम दुबई में अपना बिजनस संभाल रहा है .............
दिल खुश हो गया इतने सारे नायाब हीरों को एक साथ पाकर......
थैंक्यू फेसबुक......
थैंक्यू जुकरबर्ग
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