सवाल खुद से
आसाराम : एक आशा
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आसाराम एक ऐसा चेहरा था जो एक बहुत बड़े समूह के आराध्य देव से कम नहीं था आज जब उसके विडियो देखते हैं उसे कृष्ण बना देखकर घृणा होती है |
ये ही फितरत है हमारी जब तक ठोकर खाते नहीं है आँखे खुलती नहीं हैं |
चलो न्यायपालिका और जिसने भी इस केस में पीड़िता का साथ दिया सब बधाई के पात्र हैं लेकिन सवाल अभी भी है .....क्या उम्रकैद की सजा सुनके हम खुश हो जाएं?
क्या मान लें अब आसाराम आजीवन जेल में रहेगा ?
उत्तर में सुनिश्चित हाँ की थोड़ी कमी ही नजर आती है ..
आशंकाए मन के विश्वास से अधिक प्रबल नजर आती हैं...
हाईकॉर्ट सिंगल बैंच , डबल बैंच और सुप्रीम कॉर्ट बहुत सी जगह हैं अपील के लिए ...
भावनाएं कहती हैं अच्छा हुआ ...लेकिन उपर के न्यायालय के माननीय न्यायाधीश तथ्यों से कितना संतुष्ट होतें हैं,महत्वपूर्ण बात है |
चलो मान भी लेते हैं माननीय न्यायाधीश निचली अदालत के फैसले को बदलेंगे नहीं और आसाराम के कृत्यों की सजा उसे मिल जाएगी|
पर बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती है ...
क्या अब ऐसे कुकृत्यों पर रोक लग जाऐगी ??
क्या जरा सी भी कमी आ जाएगी ??
क्या आसाराम ही दोषी है ??
मेरा उत्तर तो एक बड़ी ना में हैं|
बहुत सारे आसाराम अभी जिंदा हैं अभी तक हमारे लिए श्रद्धेय भी होंगे ...लेकिन कब तक ???
जब तक कि वो आसाराम या रामरहीम नहीं बन जाते |
केवल वस्त्रो का रंग देखकर या ललाट देखकर ही दिग्भ्रमित हो जाते हैं या कहूं जानबूझ कर उस दलदल में फंसते हैं .......
रोजाना शोषण होता है कभी झाड़फूंक के नाम पर कभी तन्त्र मन्त्र के नाम पर और हम ...शोषित होने के बाद भी एक संतोषी भाव लेकर प्रचार में लग जाते हैं ....तैयारी में लग जाते हैं किसी और को उस दलदल में फंसाने के लिए....
खुली आँखो से दिख रहा है उसका स्पर्श ठीक नहीं है पर हम जानबूझ कर उसे सही ठहराते हैं .....
नजरें घुमाओ....
सच को देखो ........
कहीं मैं गलत तो नहीं .....बस खुद से पूछो .....जवाब मिलेगा ..जरूर मिलेगा .....प्रयास करने में क्या जाता है .....
और असफल हो भी गए तो क्या फर्क पड़ता है .....एक ही आसाराम तो जेल गया है.......
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