कुछ खास खयालात
मुरीद तो हम थे ही ना जाने अब क्या हो गए
ख्वाबों में आते थे अब रूबरू हो जाया करो
ये जो मुहब्बत है आपकी संभाली नहीं जाती
ख्वाब में तो आते हो चलो दिल में भी आ जाया करो
उस ख्वाब के खयालात भी कुछ खास होंगे
हम तो मान लेंगे आपको चिट्ठियों में ही आ जाया करो
लेते हो इम्तिहान हरदम बनके नाजुक
गजल ना सही कभी हमें शेर तो बनाया करो |
📝 किरण कुमार
Comments
Post a Comment