वन वे चौघड़िया

एक सवाल जो हिलोरें मार रहा है बड़े जोरों से
.... कुछ लोगों ने सलाह दी यात्रा के समय श्रेष्ठ चौघड़िया देख कर यात्रा प्रारम्भ करनी चाहिए | पूछा कौनसा श्रेष्ठतर है.... शुभ और लाभ और अमृत अच्छे हैं चर सामान्य है.. इसी प्रकार रोग काल उद्वेग निकृष्टतम हैं... साथ ही हिदायत दी वारवेला और कालरात्रि में तो किसी भी परिस्थिति में यात्रा प्रारम्भ करनी ही नहीं चाहिए |
  सिरोही से थिरपाली का आठ सौ किलोमीटर का सफर प्रारम्भ करना था.... प्रयोग करने की ठान ली... कालरात्रि में गाड़ी स्टार्ट कर ही ली और रवाना.... सुहावना मौसम.... एसी को ज्यादा तकलीफ नहीं हुई.... रास्ते में चाय भी ऐसी मिली कि तृप्त हो गया.... खाने के लिए होटल रुका... वाशरूम से लेकर डायनिंग हॉल तक फुल्ली हायजैनिक.... और खाना इतना लजीज कि आहाहा......
अंतत: 12 घण्टे का शानदार सफर..... प्रयोग था पर अंधेरा छंट गया |
पन्द्रह दिन बाद घर से कर्मस्थली के लिए रवाना.... वही चौघड़िया बस कालरात्रि की बजाय वारवेला..... घना कोहरा घर से झुन्झुनू तक लगभग पचास किमी की दूरी तीन घण्टे में पार की |
जयपुर पुलिया पर ऑवर स्पीड के चक्कर में चार सौ का फाईन भरा... होटलों की गंदगी झेली.... पाली के पास ओवरटेक में गाड़ी के पिछले हिस्से ने ट्रक से चुम्बन करते ही गाड़ी के साथ ही मेरे दिल की धड़कन भी स्पीडोमीटर के कांटे से बाहर निकल गई.... खैर डरते डराते.. गाड़ी के दो तीन इंच गहरा डेंट लगाके सिरोही पहुँच ही गया.....
अब दिमाग में प्रश्न हिलोरें मार रहा है..... सिरोही से थिरपाली चौघड़िया निष्प्रभावी और थिरपाली से सिरोही पूर्ण असरकारक........ अभिक्रिया संतुलित हुई.... फिर से प्रयोग करना है

Comments

  1. प्रयोग करते रहियेगा

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  2. प्रयोग करते रहियेगा

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