काले कौए
सुना था कौए हर जगह काले ही होते हैं ये साकार भी हो गया| एक लम्बा समयान्तराल सिरोही जिले में सेवाएं देते हुए निकाला, नित नये अनुभव कभी गुदगुदाते तो कभी मन टीस से भर जाता फिर भी कहना चाहूंगा कुल मिलाकर तेरह साल का अनुभव शानदार रहा |
खैर मुद्दे पर आता हूँ, सिरोही नौकरी के दौरान बहुत बार अंधविश्वास और पाखण्डो से पाला पड़ा शुरूआती दौर में एक विद्रोही और विरोधी की भूमिका में रहा लेकिन बहुमत ने मुझे पागल ही साबित किया और मैंने भी कुछ हद तक पागलपन को स्वीकार भी कर लिया|
छोटी मोटी अनगिनत घटनाएँ हुई, तथ्यों को साबित भी किया,वैज्ञानिक तर्क भी दिए लेकिन अँधविश्वास की स्याह पट्टी के सामने मेरे तर्क और वैज्ञानिकता धरी रह गई |
सिरोही का कार्यकाल पूरा हुआ और व्याख्याता के रूप में झुन्झुनू में जॉइन किया|
झुन्झुनू!! हां वो ही झुन्झुनू....
अरे जिसे शिक्षा का सिरमौर कहते हैं....
नहीं याद आया????
वो ही जहां देश का माना हुआ इन्जिनियरिंग संस्थान बिट्स है
वो ही जहां विश्व प्रसिद्ध शोध संस्थान सीरी है |
सोचा एक सपनों की दुनिया में आ गया...
स्कूलों का माहौल वैज्ञानिक होगा....
पाखण्ड और दकियानूसी सोच से परे...
पर ये क्या....
यहां भी बीमारियों का इलाज मेडिकल साइंस के पास नहीं है...
यहां भी विभिन्न बीमारियों का इलाज 'झाड़ा' तकनीक से होता है इस तकनीक को आप झाड़फूंक पद्धति भी कह सकते हैं |
सोचते होंगे अनपढ लोग इसको शह देते होंगे...
हैरानी होगी इसकी कमान तथाकथित बुद्धिजीवियों के हाथ में है |
और एक नई बात अलग अलग प्रकार की बीमारियों के लिए अलग अलग झाड़ा विशेषज्ञ होते हैं....
यहां तक कि कुछ विशेषज्ञता तो किसी गौत्र विशेष वाले महानुभाव को ही हासिल होती है.....
बाकी अगली किस्त में...
प्रेरणा के लिए शक्ति जी को धन्यवाद 😊
📝किरण कुमार
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