एक अनकही तलाश

वो उनके पहलू में
घंटो सिर रखकर
हर भाव में तलाश
कोमल सी मुस्कानों की

यूँ कभी उदासी के आलम में
खुद भी उदास हो जाना
उस उदासी में तलाश
उनकी आँखों के मैखानों की

कभी खो सा जाना कहीं
इस वज़ूद से परे
इस खो जाने में तलाश
एक हसरत उन अरमानों की

वो छुआ एक दिन
कोमल पांव मेरे हाथ से
सिहरन में भी तलाश
एक कशिश पैमानों की

रेशम सी लटों में
अंगुलियों का घुमाना
हसरतों में भी तलाश
पाने की उन जमानों की

वो समझें हमें
कि ना समझें
स्याह अँधेरों में तलाश
तारों भरे आसमानों की

📝किरण कुमार

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