आस मिलन की

आस मिलन की
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चाँदनी रात में
शहर भर की रोशनी
पिया मिलन की आस में
बैचेन सी
कभी इस घर
कभी उस मोहल्ले...
छिप गया चाँद भी
किसी अटारी की ओट में
कि तारों के मिलन में खलल ना पड़े
📝कवि..... वो ही 😊😍😘

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