दिल की आवाज
दिल ने कहा
मचल जाउं
बस उसमें ही
सिमट जाउं!!
दरवाजा बंद है
कि खुला है उनका
क्या दिल की
घण्टी बजाउं!!
निश्चल से लगे
हर वक्त वो
अरमानों को उनके
फिर से जगाउं!!
कसक उनकी
तपती रेत सी
घटाएं उमड़ें
कि बरस जाउँ!!
जा भी ना पाउं
रुक भी ना पाउं
रोकना है?
बस समझ जाउं!!!
फैलाएं बाहें
धरती सी विशाल
आकाश सा मैं
उन पर छा जाउँ!!
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