ये नारायण है
हाँ ये नारायण ही है !
मेरा पहला अनुवादक, सरकारी अध्यापक के तौर पर जब पहली बार सिरोही जिले का दूरस्थ गांव सनपुर देखा तो एक जरूरत पड़ी सखा मित्र की जो समझ सके और समझा भी सके |
गाँव में किराये का (बिना किराये) पोसाजी का मकान लिया तो सबसे पहले दो पढे लिखे युवाओं से मुलाकात हुई, शांतिलाल जी और दूसरा नारायण |
भाषा, बोली , रहन सहन और रोजमर्रा की चीजों की दिक्कत क्या होती है इस अनजान युवा ने मुझे कभी महसूस नहीं होने दी | नारायण की बाई (मम्मी) को कब काकी कहने लगा पता ही नहीं चला | अपना बनाया खाना छोड़कर काकी के हाथ का खाना और उनका प्यार अपनत्व की एक नई परिभाषा गढता था |
अपनी उलझनों को सुलझाने का एकमात्र जरिया नारायण को बना कर कभी गौर ही नहीं किया कि इस युवा की उलझने इसकी उम्र से कहीं अधिक जटिल हैं | पिताजी काम करने में ज्यादा सक्षम नहीं है और छोटे तीन भाइयों नेघर की जिम्मेदारी उठाने की बजाय नारायण की तकलीफों और जिम्मेदारी को बढाया ही |ये कहने में भी कोई बुराई नहीं कि नारायण का एक लम्बा समय गड्ढे बूरने में ही गया |
खैर पढे लिखे होने के कारण 2006 में सनपुर में ही ग्राम रोजगार सहायक की नौकरी (संविदा) पकड़ ली, नौकरी से परेशानियों में कोई कमी आई हो ऐसा मैंने नहीं देखा, पर इस युवा की सहनशक्ति किसी अनुभवी बुजुर्ग से कम नहीं थी |
कुछ वर्ष बाद ग्राम रोजगार सहायकों के स्थायीकरण की प्रक्रिया चालू हुई, मैरिट बनी, और नारायण अच्छी रैंक के साथ चयनित हुआ | लेकिन नारायण के लिए अच्छे दिन इतने आसान नहीं थे डॉक्युमेंट वैरिफिकेशन से पहले RSCIT का परिणाम नकारात्मक आया और सारी आशाएं औंधे मुँह गिरी, खूब हाथ पैर मारे, पुराने कम्प्यूटर डिप्लोमा वगैरह पेश किए पर परिणाम वो ही ढाक के तीन पात |
जिंदगी अपनी उसी अंदाज में वापस आ गई वो ही संविदा की नौकरी और वो ही गड्ढे पाटने की जिम्मेदारी लेकिन करता भी क्या, मुझसे निष्ठुर भी थे कि किसी ने मेरी गाड़ी का शीशा तोड़ दिया और भुगतान किया नारायण ने | पर हमारा प्यार बरकरार रहा |
अभी कुछ दिन पहले किसी ने सूचना दी कि नारायण LDC बन गया सुनकर मानो मुँहमाँगी मुराद मिल गई, बधाई व्हाट्सअप की और कॉल करने का विचार किया पर नहीं किया | इत्मिनान से बात करनी थी उसकी सुननी थी और अपनी सुनानी थी | पर इत्मिनान के चक्कर में एक महीना निकाल दिया |
आज दिवाली है, शुभकामना संदेशों की बाढ में एक शुभकामना नारायण की भी है... आज नहीं रूका जाता.. इत्मिनान से बात की... कैसे कोर्ट की लम्बी लड़ाई लड़ी बीए में कम्प्यूटर विषय को कोर्ट ने उचित माना और पंचायतीराज को नियुक्ति देने के लिए आदेश दिए और आखिर मेरा भाई LDC बन ही गया... सनपुर गाँव का बमुश्किल चौथा या पाँचवा सरकारी मुलाजिम ..खुशियां बेपनाह....
मुझे मेरा दिवाली गिफ्ट मिल गया |
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