विजयी अट्टहास

इधर लहू बहेगा
चीत्कार उठेंगी
सुहाग उजड़ेंगे
चूड़े फूटेंगे
और हम विजयी अट्टहास करेंगे |

मासूमों का क्रंदन होगा
विधवाओं का रोना होगा
बेटियां बेसहारा होंगी
और हम विजयी अट्टहास करेंगे |

बूढ़े बाप की लाठी छिनेगी
बुढ़िया माई की आँखे फूटेंगी
बहन का केवल इंतजार होगा
और हम विजयी अट्टहास करेंगे |

बनेगी खीर पुरी हमारी रसोई में
वो गोश्त पकाएंगे बावर्ची खाने में
परोसा जाएगा मानव मांस और लहू
और हम विजयी अट्टहास करेंगे |

मरेगा एक राम इधर भी
दफनाया जाएगा एक अली
कभी निकलेगी शवयात्रा
और बजेगी मातमी धुन
और हम विजयी अट्टहास करेंगे |
#किरण कुमार

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