बिखरे पल
ये रंज भी कुछ अपने से लगते हैं
बस चेहरे की रंगत अनजान सी है
छुपा भी लेता ये दर्द की लकीरें
कमबख्त चेहरे पर मुस्कान सी है |
दो ही कदम चला उनके बगैर मैं
ना जाने क्यों मीलों थकान सी है |
बेढ़ाल सा हो ही चला इन दिनों
मेरी खुशी भी टूटे अरमान सी है |
लौटा भी दे महक उन दिनों की
ये हँसी इक उँची परवान सी है |
#किरण कुमार
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