तन्हाई

तन्हाइयों में आवाज नहीं है
इन पंखो में परवाज नहीं है

बजते थे रातों महफिल में
उन घुँघरू में साज नहीं है

रोशन करता था जग को
उस सूरज में आग नहीं है

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