भरोसा
उसका भरोसा तोड़ने की सजा
क्या होगी ?
कैसी होगी ?
डरता नहीं हूँ सजा से
बस इंतजार है
सजा मिले
तो मुक्ति मिले
उस दर्द से
तकलीफ से
उस सजा से
जो खुद ही खुद को
दे रहा हूँ |
आँखे
उसकी चमकती आँखे
निश्तेज सी लगी
काजल भी लगा था
पर सफेद सी लगी
लगा जैसे निकाल लिया
विश्वास
जो चमकता था हरदम
हर वक्त भरोसा बन कर |
मुस्कान
उसकी चहकती आवाज
वो महकती मुस्कान
कुछ फीकी सी
गले की भरभराहट
कुछ ऐसी कि
लगता है कुछ टूटा है
कुछ बिखरा है टूटकर
शायद उसका भरोसा टूटा है
🖋🗒किरण कुमार
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