वो रोई बहुत
वो बरसी
मैं रोया बहुत
उसके आसुंओं ने
मुझे भिगोया बहुत
चले तीर
प्रीत के
उसने मुझे
मैने उसे तरसाया बहुत
वो भोर हुई
मैं सांझ बना
बस उस सपने ने
हमें मिलवाया बहुत
जी करता है
सीने से लगा लूं
उससे मिलने की चाह ने
मुझे तड़पाया बहुत
✍️में ही
4:30
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