संग मैं हूँ !

जिंदगी जब तकलीफ दे 
हालात मुश्किल हों 
घुटने लगें सांसे
हलक से निवाला ना उतरे 
दिल पर हाथ रख 
महसूस कर 
उन धड़कन के संग मैं हूँ ।

पाँव डगमगाएँ
कांपने लगे हाथ भी 
लड़खड़ाए जुबान बोलते वक्त 
निकले अल्फ़ाज़ महसूस कर 
उन अल्फ़ाज़ों में संग मैं हूँ!

जहाँ इम्तिहान लेने लगे 
खुद की रूह नासाज़ हो 
कुछ भी अपना सा ना लगे 
घुल जाए फ़िज़ाओं में ज़हर 
हवाओं को महसूस कर 
खुशबू ना सही , टूटी सांस लौट आए 
इतना सा संग मैं हूँ ।

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