लहूलुहान
अपने हाथ से
निकाला कलेजे को बाहर
खंजर मेरा ,कलेजा भी मेरा
चीर डाला
उतरा खून आँखों में बहुत
लहूलुहान थे हाथ मेरे
हाथ भी मेरे , खून भी मेरा
वो पड़ा उधर देख जमीन पर
कुछ तड़पता सा
धड़कन अभी मौजूद थी
मुझे देख रहा था कातर नजरों से
कह रहा था, कातिल है तू ...
कत्ल भी मेरा ,गुनाह भी मेरा...
तमाशबीन भी थे मौजूद वहाँ
कहा ! कौन है कातिल यहां
किसका यहां खून हुआ
मैंने कहा...
कातिल मैं हूँ
और खून भी मेरा हुआ
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